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Saturday, 15 December 2012
बलात्कार के कारण कपडे नहीं बल्कि मानसिकता है।
आज हमरे समाज में नारी उतपीडन आम बात हो गयी है , लेकिन जब तक लोग नारियो को ही दोष लगते रहे उनके कपडे, उनके भाग्य को दोष देते रहे और जब तक ऐसा सोचेगे की ये विधि का विधान है तब तक ये समस्या नहीं जाएगी। और अगर कपड़ो की वजह से बलात्कार होते हैं तो फिर बुरका पहनने वाली मुस्लिम महिलाओं के साथ इतनी बड़ी संख्या में बलात्कार कैसे होता है??? दोस्तों बलात्कार और शोषण कपड़ो की वजह से नहीं बल्कि मानसिकता की वजह से होता है। ये समस्या तब तक नहीं जाएगी की तक हम पुरुष या मादा होने पर गर्व करना नहीं छोड़े और उन धार्मिक बत्तो को आंख मुद कर मानना नहीं छोड़े , जो औरत और पुरुष में भेद की बात करता हो , जो नारी को मरने और पीटने को इज्जाजत देता हो। आपने कुरआन में भी पढ़ा ही होगा की अगर आपकी पत्नी आज्ञाकारी नहीं हो तो आप उसे बस में करने के लिए मार सकते है। (रिफरेन्स -http://answering-islam.org/Silas/wife-beating.htm ) और अपने रामचरित्रमानस में भी प्रसिद्ध वाक्य पढ़ा होगा की " द्धोल, गंवार, शुद्र, पशु ,नारी सब है ताडन के अधिकारी।" आप सभी जानते है की हमलोगों की मानसिकता बहुत हद तक हम जिस धर्मं को फॉलो करते हैं उस पर निर्भर करती है। आप लोगो से मै अपने धर्मो को छोड़ने की बात नहीं कर रहा पर धर्मं की हर एक बात बिना सोचे-समझे मान लेना कहा की बुद्धिमता है। ये बात बिलकुल सही है की आज नारी के ऊपर आत्याचार में कमी आई है, बहुत सारे परिवारों में बिलकुल भी भेद नहीं रहा। लेकिन कितने घरो और गाँवों में परिवर्तन आई है ये भी जानना जरुरी है। हमारे देश की गांवो की स्तिथि आप लोगो से छुपी नहीं , हमारे देश के गावो को देख कर लगता ही नहीं की इक्कीसवी सदी के लोग वह रहते है , अपना इतिहास नजर आता है। और हमरे देश की लगबघ 70% आबादी इन्ही गावों में रहती है। पुरुष और स्त्री प्रकृति ने बनायीं। हर जिव में नर-मादा होते हैं , लेकिन लिंग के अधार पे भेदभाव सिर्फ इंसानों में हैं। बहुत से लोग ऐसा अवैज्ञानिक दलील देते है की स्त्री पुरुष के अपेक्षा कमजोर होता है और कम योग्यता रखती है। अगर ऐसा 2 मिनट के लिए मन भी लिया जाये तो क्या जो व्यक्ति कम योग्यता रखता है उसे बराबरी के साथ जीने का अधिकार नहीं ?
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