Saturday, 15 December 2012

ना रहेगी जाति ना रहेगा आरक्षण

लोग रोज अखबारों में जाती के आधर पर किये गए शोषण  और भेदभाव की खबरे पढ़ते है फिर भी बात से इंकार करते हैं। बहुत से लोग इस विषय पर चर्चा भी नहीं करना चाहते ,यह कह कर टाल देते हैं की धीरे-धीरे जाती ख़त्म हो जाएगी। मै उनलोगों से ये सवाल करना चौंगा की आखिर धीरे-धीरे का क्या मतलब है, आप अपनी जाती पर आज भी गर्व कर ही रहे है , अपनी जाती में ही विवाह आज भी कर रहे है और आप कहते है धीरे-धीरे ख़त्म हॉप जाएगी कैसे???  मनुष्य में "जाति " प्रकृति ने नहीं बनायीं। यह एक ऐसी बीमारी है  जिसमे एक समुदाय  के लोग दुसरे समुदाय से खुद को श्रेष्ठ दिखने के लिए और दुसरो को  नीच शाबित करने के लिए इस्तेमाल करते  हैं।  ये बात सही है की है आज हमारे समाज में जाती के अधार पर शोषण पहले के अपेक्षा बहुत कम हुआ है लेकिन गाँवों में यह अभी भी उसी तरह कहर ढाह रहा है , शहरो में भी जाती के आधार पर अलग रूप में  कई जगह भेद-भाव हो रहे हैं। ये बात शहर में रहने वालो को थोरा अटपटा लगेगा और खास कर के वैसे लोगो को जो अखबार की बिसनेस, खेल और मुख्या पृष्ठ के अलावा नहीं पढ़ते। ये बिलकुल दहेज़ प्रथा की तरह है , कानूनन रूप से वर्जित है लेकिन फिर भी कई जान ले रहा है, मैंने कुछ दिन पहले दैनिक जागरण अखबार में पढ़ा था की एक सवर्ण  जाती की शादी में दलित को बराबर की कुर्सी पर बैठने  पर गोली मार दिया। ऐसी ही खबर दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर के है जिन्होंने सभी दलित छात्र को एक साथ फेल  कर दिया था, जाँच के बाद पता चला की प्रोफेसर कास्टिस्ट था। अगर गाँवो की खबरे पढ़े तो मिलता है की किसी सरकारी स्कूल में टीचर दलित बच्चो को कक्षा के बहार बैठाथा  था , पहले तथाकथित ऊँच जात के बच्चो को फिर दलितों को अगर उंच जाति का कोई बच्चा अनुपस्तिथ रहे फिर भी उनकी सिट खली रहती थी लेकिन उसमे दलित का बच्चे को बैठने नहीं दिया जाता। कभी दलितों की बेटी के साथ बलात्कार तो कभी मंदिर में प्रवेश निषेध जैसी खबरों  को देख कर क्या कोई कह सकता है की आज जाती की आधार पर सौतेला व्यवहार और भेद-भाव नहीं हो रहा???


यही कुछ खबरे नहीं जो आज के समाज में जाति के आधार पर भेद-भाव तथा शोषण की पुस्टी करती है, बल्कि ऐसा कोई दिन नहीं जिस दिन ऐसी घटना न हुई हो।आप शहर के गट्टर को साफ़ करने वाले, भंगी का काम करने वाले, चमड़ा उठाने वालो के बिच जाइये और देखिये की कितने ब्राह्मण, राजपूत और बनिया जाती के लोग वह काम करते हैं? एक भी नहीं।तो क्या ये सवाल स्वाभिक रूप से नहीं उठता की आज आजादी के 65 साल बाद ये वही काम क्यों कर रहे है, जो आजादी के पहले करते थे क्या इनको किसी का मल-मूत्र साफ़ करने में मजा आता है? क्या किसी को इसमें अच्छा जिंदिगी जीने का मन नहीं करता ?? नहीं ऐसा बिलकुल नहीं , किसी को भी आत्याचार, गरीबी और ऐसे काम करने में मजा नहीं आ सकता। फिर क्यों ये लोग ऐसी जिंदिगी जीने को मजबूर है?? सरकार इनपर ध्यान क्यों नहीं देती ? यही नहीं इनके बच्चों को भी यही काम करना पड़ेगा अगर ऐसा चलता रहा तो क्योकि इनके बच्चो को पढने के लिए स्कूल नहीं, खाने को रोटी नहीं, अगर किसी स्कूल में पढने जाते भी है तो ये काम नहीं करेंगे तो खायेंगे कैसे ?? हाँ , ये बात भी सही है की इसी जाती के कुछ लोग I.A.S./ I.P.S. जैसे अच्छे  पद पर भी है जो किसी तरह संयोग्य से आगे बढ़ पते है। लेकिन क्या हमलोगों को इन्हें संयोग्य  और किस्मत के भरोसे छोड़  देना चहिये ?


अगर इतना जानने के बाद भी आपको लगता है की जाति  नहीं है इस समाज में तो मै  आपसे कुछ  पूछना चाहता हूँ , की आपके परिवार और आसपास  में कितने लोगो के अंतर्जतिये विवाह हुए है , क्या आपने कभी अख़बार में वर-वधु वाला पेज नहीं देखा, क्या उस पेज में योग्यता और नाम से पहले जात नहीं लिखा नहीं देखा ? आपने अपनी जिन्दगी में कभी किसी ब्राह्मण, राजपूत,जाट या तथाकथित उंच जाति को अपने जात के ऊपर गर्व करते नहीं देखा?  क्या अपनी जाति  में हि शादी करना जाती-पति को बढ़ावा देना नहीं, क्या यह जाती के आधार पर भेद-भाव नहीं ?? क्या अगर हम अगर इसी तरह जाति देख कर शादी करते रहे तो क्या कभी जाती ख़त्म हो जाएगी? और जब तक जाती रहेगी तब तक उंच-नीच और भेद-भाव रहेगा। जाती को पूर्ण रूप से ख़त्म करने का एक उपाए है, अगर सब लोग बिना जात देखे सिर्फ अपनी पसंद और प्यार देख कर शादी करे तो एक पीढ़ी के बाद पता ही नहीं होगा की कौन किस जाती का है।और जब लोगो को अपनी जाति पता ही नहीं होगी तो स्वाभिक है की भेद-भाव और उंच-नीच अपने आप मिट जायेगा लेकिन जब तब हम ऐसा नहीं करते तब तक जाती रहेगा भले उसके आधार पर भेद-भाव में कमी आ जाये।

आब मै इस बात से सन्तुष्ट हु की मैं अपनी बात बताने में सफल रहा। अब मै पूर्ण रूप से कह सकता हूँ की अगर अब भी किसी को जाति की वजह से परेशानी नहीं दिखती तो जरुर उस व्यक्ति को आरक्षण और स्वार्थ की वजह से नहीं दिख रही उस लग रहा होगा की अगर मैंने ये स्वीकार कर लिया तो मियो इन दलित लोगो से आराक्सं कैसे छिन  सकूँगा? मई उस व्यक्ति को अस्वासन देता हो की तुम आरक्षण तब भी ख़त्म कर सकते हो बस अपने परिवार और अपने लोगो का विवाह दूसरी जाती में करा कर। ना रहेगी जाति ना रहेगा आरक्षण। लेकिन  जब तब तक आप दुसरे जाती को नीच समझ कर उसमे कितने भी योग्य व्यक्ति को अपनी बेटे या बेटे से विवाह  नहीं कराएगा क्योकि सिर्फ आप बड़े जात का होने पर गर्व कर सके तो तब तक आप भी आरक्षण को बढ़ावा दे रहे है,,, आरक्षण के विरुद्ध बोलने वाले हर  उस व्यक्ति से यही कहना चाहूँगा  की जाति ख़त्म करे आरक्षण अपने आप चली जाएगी।

Satyamev Jayate Untouchability - Dignity for Allhttp://www.youtube.com/watch?v=lJ3XV_6hJacIndia Untouched: Research Documentary!http://www.youtube.com/watch?v=lgDGmYdhZvUThe Death Of Merit - Manish Kumar (IIT Roorkee) http://www.youtube.com/watch?v=QA3wEeD4m2g&feature=relmfuhttp://www.youtube.com/watch?v=4SRzk8Sf32Q&feature=relmfuA 6 Year Old Girl Thrown On Fire For Walking On Upper Caste Roadhttp://www.youtube.com/watch?v=eP26sTtofyM&list=UU3y3_6jZYetKLM-GILeKJ_g&index=3&feature=plcphttp://www.youtube.com/watch?v=lgDGmYdhZvU

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