Sunday, 13 January 2013

मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा कि मै धर्म को फॉलो करता हूँ , लेकिन आँख मूंद कर नहीं। मेरा उनके लिए जबाब सबके सामने क्योकि ये किसी एक व्यक्ति की बात नहीं। मै कहना चाहूँगा की ये कैसे हो सकता है की आप आंख खोल कर धर्म का पालन कर रहे है ?आपको धर्म की सब बाते पता है फिर तो आप उसी स्तिथि में फॉलो करेंगे जब आपको धर्म से कोई आर्थिक , सामाजिक या अन्य लाभ होगा। नहीं तो आप पागल थोड़ी न है की जो खुद को आच्छा नहीं लगेने वाला व्यव्हार धर्म के नाम पर दुसरो के साथ करेंगे। आप इतने बड़े पागल थोड़ी है जो इन्सान को धर्म के नाम पर काटयेगा, औरत को नीच और वास्तु मात्र बताने वाली पुस्तक को पुजियेगा?? अगर आप फॉलो कर रहे है तो आपको जरुर पता नहीं है की उसमे स्त्री विरोधी बाते लिखी है , उसमे पुनः-जन्म और भाग्यवाद के सिद्धांत भरे पड़े है। वही पुनः-जन्म और भाग्यवाद जिसकी वजह से हजारो सालो से स्त्री और शुद्रो के नाम पर इंसान का शोषण होता रहा और वे चुप-चाप यही समझ कर सहते रहे की ये उनके भाग्य में यही लिखा है और पिछले जन्म के कर्मो का फल है। वाह क्या तरीका अपनाया धर्मं वालो ने जिसके साथ जो मन आये वो करो और कहो की तुम्हारे भाग्य में यही लिखा है। आज भी किसी गरीब या दबे कुचले से पुछये की वो संघर्ष क्यों नहीं करता तो वो आपको यही कहेगा की भाग्य में ही ये लिखा है, जो लिखा है वो तो होना ही है। । अगर आप ये सब जानते हुए भी धर्म का पालन कर रहे है तो आपको सम्भोदित करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं। अगर मै आपको जल्लाद कहु तो जल्लाद भी कहेगा की हमें क्यों इनके साथ मिला रहे हो हम तो किसी अपराधी को फंसी पर लटकाते है, और ये लोग तो उस धर्म का समर्थन और पालन कर रहे है जो किसी जाती या स्त्री में जन्म लेने को ही पिछले जन्म का अपराध बताता हो। ये उस धर्म को पालन करने की बात करते है जिसकी वजह से सदियों तक औरतो और कुछ जाति के लोगो की जिंदिगी नर्क से भी बेकार हो गयी। क्योकि इस धर्म ने उनसे पढने का अधिकार छिन लिया,उनकी बराबरी का अधिकार छिन लिया , अगर वे वेद वाक्य सुन ले तो उनके कान में खौलते तेल डालने और अगर वे मंत्र उच्चारण कर दिया तो जिह्वा काटने जैसे दंड प्रवधान करता हो। नहीं नहीं आप ऐसे धर्म को जरुर नहीं जानते नहीं तो आप कभी गलती से भी ऐसे धर्म को फॉलो करने की बात नहीं करते। आप ऐसे धर्म को कैसे पालन कर सकते है जो मनुष्य के छूने मात्र से अपवित्र हो जाता है और फिर किसी जानवार के मूत्र से पवित्र होता हो?? आप ऐसे धर्म को फॉलो करने की बात कैसे कर सकते है जो की औरत को वश में रखने के लिए मरने-पीटने तक की वकालत करता हो। ऐसा धर्मं भी है जो की किसी भी गलती की माफ़ी उतने दाम के "कॉन्फेशन लेटर" यानि पैसे लेकर देते थे। आप ऐसे धर्मो को आँख खोल कर कैसे पालन कर सकते है जो हमेशा से विज्ञान और प्रगति के विरुद्ध रहा हो?? आप जरा कल्पना कीजिये की बिना विज्ञान का विकास के जिंदिगी कैसी होती। यूरोपियन देशो के धर्मो ने कई वैज्ञानिक की जान सिर्फ इसलिए ले ली क्योकि उन्होंने अपने खोज,तर्क और तथ्य के आधार पर कुछ कहा जो की आपके धर्म में लिखी बातो की विपरीत निकली जिसे अपने अपने मन से गढ़ था और का भगवान् का नाम लगा दिया था । जैसे की गैलिलियो को सिर्फ इस बात के लिए फांसी मिली क्योकि उसने कहा था कि सूर्य पृथ्वी के चक्कर नहीं लगाती बल्कि पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है। आर्यभट को इस लिए बहिष्कार किया गया और सबके सामने बेज्जत किया गया क्योकि उसने कहा था की पृथ्वी तस्तरी की तरह नहीं और नहीं किसी विष्णु भगवान के शेष नाग पर टिकी हुई है बल्कि यह गोल है और हवा में लटकी हुई है। आपको शर्म नहीं आती टी.वी , मोबाइल, कंप्यूटर, हवाई जहाज़, रेल, बस , कार, मोटर-साइकिल, बिजली और अन्य अविषकार प्रयोग करते हुए जब आप उसके विरोध करने वाले के फॉलो करने की बात करते है। भाग्य और भविष्य वाले बाबा भी आज कंप्यूटर का प्रयोग कर रहे है आज उनकी दिव्या दृष्टि कहा गयी? जो साधू-संत इतने दूर बैठे भगवान से मन ही मन बात कर लेते है उन्हें भी आज मोबाइल कि जरुरत है। नहीं आपको इन सभी बातो का एहसास बिलकुल नहीं, नहीं तो आप कभी भी धार्मिक नहीं होते। आप बेशक बहुत पढ़े-लिखे है बड़े डॉक्टर ,इंजिनियर है, वैज्ञानिक है लेकिन आपको धर्मं और उसमे लिखी बातो का पता नहीं। अगर ये सब बाते पता है और आप फिर भी धर्म को फॉलो कर रहे है तो आपके अन्दर इन्सनियात मर गया है। अगर आपका ये कहना है की आप उसमे की अच्छी बातो को मानते है बुरी चीजों को नहीं तो मुझे एक बात बताये की बलात्कारियो कि एक बड़ी अच्छी आदत है वे समय के बड़े पक्के होते है, कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देते। क्या उनके इन जैसी हज़ार अच्छी आदतों और बातो की वजह से उनको फॉलो करेंगे और इगनोरे कर देंगे की वे बलाताकरी मानसिकता के है??? क्या आपको दुनिया में और कोई व्यक्ति आदर्श बनाने को नहीं मिला। वैसा ही धर्म के मामले में है इसमें हज़ार अच्छी बाते लिखी हो लेकिन जो शोषण, उंच-नीच को हि सही ठहरा दिया , अब उससे बचा ही क्या ? दुनिया में अच्छी बाते सिखने के लिए और कोई किताब नहीं क्या? अगर अब आपका ये कहना होगा की सभी लोग मानते है इस लिए मै भी फॉलो करता हु तो मै ये कहूँगा की अपना दिमाग वैज्ञानिको को बेच दे अनुसंधान के लिए तो शायद कुछ प्रयोग में आ जाये। अगर आप मुझे इसके गली भी देंगे या मार भी देंगे तो दुःख नहीं।अगर मेरा सोंच का एक भी व्यक्ति ना हो फिर भी आप जैसो की भीड़ में खड़ा होकर जीने से अच्छा है अकेला मरना। मेरी बातो का कतई भी इरादा आपको ठेस पहुचने का नहीं है, बस मेरी इतनी ही चाहत है की आप अपने विचारो का पुनः-मूल्यांकन करे जिसे बदलने की जरुरत है।
-राहुल एक विद्रोही

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