Sunday, 13 January 2013

हम आपको बता ही रहे थे की धर्म और धर्मग्रंथो के अंदर क्या है। इसे भगवान् ने नहीं बल्कि कुछ इंसानों अपने निजी लाभ और खुद का वर्चस्व बनाये रखने के लिए बनया। तभी मोहन भागवत और आशाराम जैसे धर्मरक्षक और धर्म गुरुओ ने अपने कपडे खुद उतरने शुरू कर दिए और दिखा दिया की धर्म में क्या है , ये कभी भी औरत को सामान और बराबर समझ ही नहीं सकते। ये उनके ऊपर हो रहे शोषण के लिए उन्ही को जिम्मेदार ठहरायेंगे, उनके कपड़ो,उनकी आज़ादी को जिम्मेदार कहेंगे। इनके हिसाब से स्त्री को हमेशा पिता, पति या पुत्र के अधिन रहना चाहिए। ये उन्लोगो ने खुद शाबित कर दिया। ये हमेशा से नारी शिक्षा के विरोधी रहे इन्होने यहाँ तक की एक प्रथा चलाया था जिसके अनुसार अगर कोई स्त्री पढ़ती है तो उसका पति मर जायेगा। महात्मा फुले और सावित्री बाई फुले के आने के देश में पहला लडकियों के लिए स्कूल खोल गया। इनके अनुसार स्त्री को घर में ही रहना चाहिए और घर के काम काज ही करने चाहिए। ये मनुस्मृति को पूजने की बात करते है अगर कोई स्त्री को मनुस्मृति पढने का मौका मिले तो जरुर पढ़ कर देखे। आपको खुद आपकी बर्बादी और पिछड़ेपन का कारण मिल जायेगा।
-राहुल एक विद्रोही
 

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