मुझे लगता है की बहुत से लोग सिर्फ इसलिए धार्मिक है क्योकि उन्हें लागता है कि भगवान् या अल्लाह ने धर्म बनाया और धर्म ग्रन्थ लिखे। जिस दिन इनको ये बात समझ में आ जायेगी कि एक भगवान् दो तरह की बाते कैसे कर सकता है वह भी बिलकुल विपरीत और भगवान् को इतना कम ज्ञान ज्ञान कैसे हो सकता है कि वह कही लिखेगा पृथ्वी तस्तरी की तरह है और शेष नाग पर टिकी हुई है और कही कहेगा की अंडे की तरह है, उस दिन धर्म के दुकानपर ताला लग जायेगा। लोग पता नहीं भगवान् को इतना जालिम और पागल क्यों समझते है कि वह पिछले जन्म कि सजा इस जन्म में देगा और वह भी उस गलती की जिसका व्यक्ति को पता ही नहीं। वह स्त्री विरोधी कैसे हो सकता है वह कैसे कह सकता है की स्त्री बहुमुल्य अमानत है यानि वास्तु है जिसे वश में रखने के लिए आप मार-पिट भी सकते है। वह औरत और मर्द के लिए अलग नियम कैसे बना सकता है कि एक आदमी जितनी चाहे उतनी शादी कर ले पर विधवा औरत को एक शादी का भि अधिकार नहीं। नहीं वह अपने बच्चो के साथ सौतेला व्यवहार नहीं कर सकता?? अगर वह ऐसा करता है तो मै उसकी भक्ति सिर्फ इस लिए नहीं कर सकता की उसने मुझे बनाया है। जैसे की एक माँ अगर अपने बच्चे को जन्म दे कर , वो उसे मरने के लिए फेक देती है तो वह माँ भक्ति की पात्र नहीं। उसी प्रकार अगर आप कहेंगे की ईश्वर इतना बुरा और जालिम है, तो मै ऐसे इश्वर का विद्रोह करता हूँ। दोस्तों भगवान् रास्ता दिखने वाला है भटकने वाला नहीं जो ऐसी फिजूल की बाते करेगा। उसने हमें सोचने के लिए विवेक दिया ताकि हम किसी की कही बातो पर विश्वास न कर के तर्क और तथ्य के आधार पर कोई बात माने। अगर उसे बाबाओ/ पंडित-पोंगियो/ मुल्लो/पादरियों को ही हमारे बिच में रास्ता दिखने के लिए भेजना होता तो फिर हमें दिमाग नहीं देता। शायद वह जनता हो की बहुत लोग धुर्त भी है और वो जानते है की मै कभी सामने नहीं आऊंगा और इस का बात का ये धुर्त फायदा न उठा ले इसीलिए उसने हमें दिमाग दिया होगा। आप सब इतिहास और विज्ञान पढ़कर भी क्यों नहीं समझते की धर्म कब आया और किस लिए आया? अगर नहीं जानते तो आपको इतिहास पढने की जरुरत है। फिर सब माजरा समझ में आ जायेगा। जिस दिन आप सब को ऐहसास हो जायेगा की भगवान् ने धर्म नहीं बनाया उस दिन सारी ढोंग-पाखंड की दुकाने बंद हो जाएँगी। जिस दिन आपको इस बात का एहसास हो जायेगा की भगवान् हर जगह है उस दिन आप मंदिर-मस्जिद और गिरजाघर जाना बंद कर देंगे और उस पर करोड़ो-अरबो लुटाना बंद कर के वह पैसा समाज को देंगे। जिस दिन आपको एहसास हो जायेगा कि कर्म ही पूजा है उस दिन आप उसकी घंटो बैठ कर भक्ति नहीं करेंगे। जिस दिन आपको एहसास हो जायेगा की सब कुछ दिया हुआ भगवान का ही है और भगवान आपके लड्डू का मोहताज़ नहीं उस दिन एक नयी दुनिया का ही निर्माण होगा जंहा समानता होगी, भाईचारा होगा , बराबरी और इन्साफ होगा।क्योकि वह आपका धर्म आपका दिमाग होगा , आपको गाइड कोई किताब और बाबा नहीं बल्कि आपका पाना दिमाग करेगा । मै ऐसे लेख इसी उम्मीद में लिख रहा हु और उनलोगों तक पहुचने कि ज्यादा कोशिश कर रहा हु जिन्हें इंसान से जयादा हिन्दू/ मुस्लिम और इसाई होने का गर्व है।
- राहुल एक विद्रोही
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